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    शिमला और किन्नौर एपीएमसी

    पंजाब राज्‍य भूगोल कोश के अनुसार- पूर्वकालिक बुशहर राज्‍य शिमला पहाड़ी राज्‍य को 1803 से 1815 तक गोरखा घुसपैठ का सामना करना पड़ा था। राजा केहरी सिंह के निधन के तुरंत बाद गोरखाओं ने बुशहर पर बड़ा हमला बोल दिया। नाबालिग शासक और उसकी मां हमले के समक्ष डट नहीं पाए और नामरू भाग गए। वे लोग अपने पीछे सराहन में एक बड़ा खजाना भी छोड़ गए। गोरखाओं ने खजाने को लूट लिया और राज्‍य के सभी अभिलेख पूरी तरह नष्‍ट कर दिए। यहां रहते हुए नेपाल के गोरखाओं ने 18वीं सदी के अंत तक अपनी रियासत का काफी विस्‍तार कर लिया। गोरखा नेता अमर सिंह थापा कांगड़ा घाटी में गया। वहां से रणजीत सिंह और कांगड़ा के राजा संसार चंद की बहादुर फौजों ने उसे खदेड़ दिया। 1809 में रणजीत सिंह और ब्रिटिश सरकार के बीच हुई संधि के साथ ही सतलुज और जम्‍मू के बीच का भूभाग ब्रिटिश सुरक्षा के तहत आ गया। इस प्रकार गोरखाओं को खदेड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार ने सकारात्‍मक कदम उठाए और एक लंबे एवं दुस्‍साहसिक संघर्ष के बाद 15 अप्रैल, 1815 को अमर सिंह थापा को पूरी तरह से पराजित कर दिया। गोरखा युद्ध की समाप्‍ति पर 6 नवंबर, 1815 करे राजा महेंद्र सिंह को सनद प्रदान की गई। इसने खनेती और देलथ ठाकुरियास बुशहर को दे दिया और राज्‍य के जिले राविन का एक हिस्‍सा क्‍योंथल को स्‍थानांतरित कर दिया गया। कुमारसेन एक अलग ठाकुराई के तौर पर गठित किया गया।

     पूर्वगामी लेखों से यह लगता है कि रियासतों के दौरे में किन्‍नौर घाटी ने बुशहर राज्‍य के लिए बांध का काम किया। हालांकि, सर्वोपरिता खत्‍म होने के बाद किन्‍नौर, जो कि उस वक्‍त चीनी तहसील के रूप में जाना जाता था, का विलय कर तत्‍कालीन महासू जिले का ही एक भाग बना दिया गया। परगना अठारह बीस में गांव नीचर, सुंगरा, कंगोज, पोंडा, बारो, बारी, टरांडा, पोंडा में पटवार सर्कल के साथ गांव चारुआ शामिल थे। परगना बीस में नाथपा, कंधार, बड़ाखंभा, छोटाखंभा, घड़सू और रुपी की राजस्‍व परिसंपत्‍तियां शामिल थीं। रूपी में पटवार सर्कल के साथ रूपी रामपुर तहसील में थी। दरअसल, तत्‍कालीन चीनी तहसील संपूर्ण किन्‍नौर घाटी को कवर करती थी। यह वांगतू से भी आगे जाती थी, जिसका निर्माण 1891 में तत्‍कालीन शासक टीका रघुनाथ सिंह ने किया था। इस प्रकार वांगतू से भी आगे तक फैले व्‍यापक क्षेत्र के साथ चीनी तहसील 1960 तक अस्‍तित्‍व में रही। 1947 तक यह तत्‍कालीन महासू जिले की एक तहसील थी। 1960 तक पुनर्गठित हो रहे सीमा क्षेत्र के महत्‍व का अहसास किया गया और इसके परिणामस्‍वरूप जातीय और सांस्‍कृतिक आधार पर  रामपुर तहसील का कुछ हिस्‍सा मिलाकर इसका पुनर्गठन करके इसे किन्‍नौर जिला बना दिया गया।