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    सोलन एपीएमसी

    मंडी समिति, सोलन वर्ष 1975 में अस्‍तित्‍व में आई थी। इसके अधिसूचित क्षेत्र में पूरा सोलन जिला और सिरमौर जिले की राजगढ़ तहसील शामिल हैं। तब से अब तक सोलन, कंडाघाट, कुनिहार, धर्मपुर, चक्‍की-दा-मोड़, टर्मिनल मंडी परवाणु, जगजीतनगर, बनालगी, नालागढ़, रामशहर, अर्की, कुनिहार और राजगढ़ में आधुनिक विपणन सुविधाओं से युक्‍त ऐसी 13 मंडियां स्‍थापित की जा चुकी हैं, जहां हिमाचल प्रदेश कृषि उत्‍पाद मंडी अधिनियम, 1969 (1970 की अधिनियम संख्‍या 9), जो कि हिमाचल प्रदेश कृषि एवं बागवानी उत्‍पाद विपणन (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 2005 (2005 की अधिनियम संख्‍या 20) की धारा 86 के जरिये निरसित हो चुका है के प्रावधान लागू होते हैं। कृषि उत्‍पादों की खरीद-फरोख्‍त के बेहतर नियमन और जिले के उत्‍पादकों को विपणन एवं सूचना सुविधाएं उपलब्‍ध करवाने के उद्देश्‍य से राज्‍यपाल ने 25 मई, 2005 को इस नए अधिनियम को मंजूरी दी थी। शुरुआत में वर्ष 1975-76 के दौरान मंडी समिति की आमदनी 49,874 रुपए थी जो कि वर्ष 2004-05 में बढ़कर 2,46,47,960 रुपए हो गई। प्रमुख मंडी स्‍थल की स्‍थापना के लिए कथेर सोलन में स्‍थित 10047 वर्ग मीटर सरकारी भूमि लीज के आधार पर कृषि विभाग को हस्‍तांतिरत की गई। सोलन में एपीएमसी ने 6.5 करोड़ रुपए की लागत से सभी जरूरी आधुनिक सुविधाओं से युक्‍त एक आधुनिक मंडी का निर्माण किया है। यहां पर किसानों को एक विश्राम गृह, रैन बसेरा, बैंक इत्‍यादि की सुविधा उपलब्‍ध करवाई जाती है। 50 दुकानों और 2 नीलामी चबूतरों का निर्माण वर्ष 2002 में पूरा हुआ। अभी सोलन मंडी के आगे भी विस्‍तार का प्रस्‍ताव है, जो कि आने वाले वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरा होगा। यह परियोजना पूरी होने के साथ ही यह मंडी उत्‍तरी भारत में सबसे बेहतर आधुनिक मंडियों में से एक होगी।