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    कार्यक्रम

    मंडी स्थमलों का निर्माण

    पूरे राज्य  में मंडियों के विकास की जरूरत के मद्देनजर दुकान-सह-गोदाम, नीलामी चबूतरा, किसान विश्राम गृह, अंदरूनी सड़कें, चारदीवारी, पीने के पानी की सुविधा, कैंटीन, बैंक की सुविधा इत्या,दि जैसी ढांचागत सुविधाएं उपलब्धी करवाने के लिए बोर्ड मंडी स्थजलों में निर्माण कार्यों की राज्यह स्तकरीय योजना और क्रियान्वदयन का भी संचालन करता है। उत्पाोदकों को अपने खेतों के नजदीक विपणन सुविधाएं उपलब्धट करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

    मौजूदा मंडी स्थरलों का आधुनिकीकरण और विस्तार

    बोर्ड/मंडी समितियों द्वारा निर्मित अधिकतर प्रमुख मंडी स्थ लों में आधुनिक विपणन सुविधाओं की कमी है और वे भीड़ भरे हैं। संभालने की क्षमता बढ़ाने और आधुनिक विपणन सुविधाएं उपलब्ध  करवाने की सख्तओ जरूरत है। राज्यभ में मौजूद विभिन्नक मंडी स्थुलों के विस्ताउर और आधुनिकीकरण के लिए हिमाचल प्रदेश राज्ये कृषि विपणन बोर्ड पहले ही कई पहल कर चुका है। पहले चरण में प्रमुख मंडी स्थधल, ढाली (शिमला) को लिया जा रहा है।

    संपर्क सड़कों का निर्माण

    उचित सड़कों के अभाव में किसानों को अपने उत्‍पाद स्‍थानीय व्‍यापारियों को बेचने पर मजबूर होना पड़ता है या फिर उन्‍हें अपने उत्‍पाद सिर पर या खच्‍चरों पर ढोकर सड़क तक पहुंचाने पड़ते हैं। इसकी वजह से विपणन लागत में भारी वृद्धि हो जाती है। इस अड़चन को मिटाने के लिए बोर्ड संपर्क सडकों का निर्माण कर रहा है, ताकि किसान हर प्रकार की मौसम परिस्‍थितियों के बीच सालभर अपने उत्‍पाद मंडी तक पहुंचा सकें।

    मंडी सूचना के जरिये किसानों का सशक्ति करण

    मंडी सूचनाओं और आंकड़ों के त्वअरित संग्रहण और प्रसारण के लिए राष्ट्रजव्यापी नेटवर्क स्थानपित करने के लिए भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने आईसीटी आधारित कृषि विपणन सूचना नेटवर्क की केंद्रीय क्षेत्र योजना (AGMARKNET) लॉन्चे की है, ताकि किसानों को बेहतर भाव दिलाने के लिए इस जानकारी का कुशल और समयबद्ध प्रयोग किया जा सके। उत्पाहदन और विपणन की योजना बनाते वक्तत किसानों को मंडी सूचनाओं की जरूरत पड़ती है। फलदायक व्या पारिक निर्णयों के लिए मंडी के अन्य  प्रतिभागियों को भी इस सूचना की जरूरत पड़ती है। संपूर्ण और सटीक मंडी सूचना का अस्ति्त्वि और प्रसारण मंडी प्रणाली में संचालनगत और कीमत निर्धारण की कुशलता प्राप्त  करने की कुंजी है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की उन्नेति ने दुनिया को काफी छोटा बना दिया है। AGMARKNET पोर्टल (http://agmarknet.nic.in) पर 300 से ज्याफदा मंडियां नियमित रूप से अपने यहां के भाव रिपोर्ट करती हैं, जिसे तुरंत प्रसारित कर दिया जाता है। हिमाचल प्रदेश के 14 नोड्स भी इस पोर्टल को अपना डाटा भेजते हैं। इस वेबसाइट पर जाकर कोई भी किसान/बागवान देशभर की मंडियों में अपने उत्पाटद की कीमत देख सकता है।

    कृषि विपणन से संबंधित विभिन्‍न संगठनों की वेबसाइट तक पहुंचने के लिए भी AGMARKNET पोर्टल एक सिंगल विंडो की तरह काम करती है। प्रमुख वस्‍तुओं के बारे में यह प्रमुख मंडियों के साप्‍ताहिक रुझानों का विश्‍लेषण भी उपलब्‍ध करवाती है। तिलहन, रेशेदार फसलों इत्‍यादि के वायदा भाव उपलब्‍ध करवाने के लिए यह ऑनलाइन कमोडिटी एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ भी जुड़ी हुई है। FAO वेबसाइट पर उपलब्‍ध विभिन्‍न कृषि वस्‍तुओं के अंतर्राष्‍ट्रीय भाव रुझानों तक भी इस पोर्टल के जरिये पहुंचा जा सकता है। इस पोर्टल को निरंतर समृद्ध किया जा रहा है। प्रस्‍तावित योजना बड़ी मंडियों के बारे में गुणवत्‍ता, पैकिंग, मानक इत्‍यादि से जुड़ी सूचनाएं भी उपलब्‍ध करवाएगी।

    सरकारी विभागों और केंद्रीय एजेंसियों, जैसे कि खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, उपभोक्‍ता मामले, स्‍वास्‍थ्‍य एवं सीसीआई, जेसीआई, एनसीडीसी, एनएएफईडी, एनटीजीएफ, टीआरआईएफईडी, एनसीसीएफ, एनडीडीबी, एनएचबी, एपीईडीए, एमपीईडीए की ओर से कृषि विपणन के संबंध में लागू की गई योजनाओं की जानकारी भी प्रयोक्‍ता मैत्री तरीके से प्रसारित की जाएगी। मंडियों और अन्‍य प्रयोक्‍ताओं के बीच समयबद्ध और प्रभावशाली तरीके से सूचनाओं के आदान प्रदान की सुविधा प्रदान करने के लिए AGMARKNET के नोड्स की एक ई-डिक्‍शनरी भी पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी। गुणवत्‍ता प्रमाणन समर्थित कृषि उत्‍पाद स्‍टैंडर्डाइज और लेबल्‍ड होने के बाद इसे राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय मंडियों में सीधे तौर पर बिक्री के लिए वेबसाइट पर रखा जा सकता है। 

    संग्रहण केंद्रों का निर्माण

    पहाड़ी इलाका होने के चलते उत्पाचदन क्षेत्र छोटी-छोटी इकाइयों के रूप में बिखरे पड़े हैं। आमतौर पर ऐसे क्षेत्रों में परिवहन के साधन आसानी से उपलब्धे नहीं होते। किसान अपने उत्पाबदों को सड़क के किनारे तक ले आते हैं और यहां पर परिवहन के साधनों और व्या्पारियों का इंतजार करते हैं। चूंकि कृषि उत्पाकदों की कोई सुरक्षा नहीं होती ऐसे में यह मौसम की मार या चोरी इत्यापदि के लिए खुले होते हैं। किसानों को ऐसे नुकसान से बचाने के लिए रणनीतिक रूप से महत्व पूर्ण बिंदुओं पर संग्रहण केंद्र बनाने की योजना बनाई गई है।

    किसान जागरूकता शिविर

    कटाई के बाद फसल को संभालने की तकनीकों और विपणन की अपर्याप्‍त जानकारी के चलते किसानों को अपनी फसल और कठोर मेहनत के अनुसार पैसे नहीं मिल पाते। ऐसे में किसानों को कटाई के बाद के प्रबंधन, कृषि विपणन, मंडी नियमन इत्‍यादि के बारे में जागरूक करने के लिए किसान जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं। हरेक प्रशिक्षण शिविर में 100 किसान शामिल होते हैं। हिमाचल प्रदेश विपणन बोर्ड, मंडी समितयों, कृषि और वानिकी विभाग एवं कृषि एवं वानिकी विश्‍वविद्यालयों के अधिकारी इन शिविरों में रिसोर्स पर्सोनल के रूप में भाग लेते हैं।

    किसान एक्स्पोजर यात्राएं 

    देशभर के कृषि विश्‍वविद्यालय और संबंधित संस्‍थान कटाई के बाद फसल प्रबंधन को लेकर निरंतर सुधरी हुई और वैज्ञानिक तकनीकें विकसित करते रहते हैं। मोटे तौर पर देखें तो ऐसे संस्‍थानों/ संगठनों के निकटवर्ती इलाकों में रहने वाले किसानों को इसका फायदा भी पहुंचता रहता है। न केवल फसल की मात्रा बढ़ती है, बल्कि उनकी आमदनी में भी अच्‍छा खासा इजाफा होता है। लेकिन दूरवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसान इस तकनीकी उन्‍नयन का लाभ उठाने में सक्षम नहीं होते हैं। इसलिए, इन किसानों को भी ऐसे सेंटर्स ऑफ एक्‍सीलेंस के तकनीकी उन्‍नयन की जानकारी देना जरूरी है। इन तथ्‍यों के मद्देनजर बोर्ड ने राष्‍ट्रीय वानिकी बोर्ड की मदद से किसान एक्‍सपोजर यात्राएं आयोजित करता रहता है।

    प्लानस्टिोक क्रेट्स का वितरण 

    फल और सब्‍जियों की प्रकृति काफी विनाशशील होती है। कटाई या तुड़ाई के बाद फलों और सब्‍जियों में होने वाला नुकसान 8 से 37 प्रतिशत तक होता है। अनुपयुक्‍त पैकिंग सामग्री का प्रयोग इस नुकसान की एक बहुत बड़ी वजह है। आमतौर पर पैकिंग के लिए बांस की टोकरी, बोरे अथवा लकड़ी के डिब्‍बों का प्रयोग किया जाता है, जो न केवल उत्‍पाद की गुणवत्‍ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, बल्‍कि वनों पर भी दबाव बढ़ाते हैं। ऐसे में किसानों को नई पैकिंग सामग्री का प्रयोग करने के प्रति प्रोत्‍साहित करने की जरूरत है। इस तथ्‍य के मद्देनजर राष्‍ट्रीय वानिकी बोर्ड की मदद से किसानों को सब्‍सिडाइज्‍ड मूल्‍य पर प्‍लास्‍टिक क्रेट्स वितरित की जाती हैं। ये क्रेट्स हल्‍की होती हैं और कम स्‍थान घेरती हैं। साथ ही ये लंबी चलती हैं और इनकी सतह भी समतल होती है। संग्रहण, ग्रेडिंग और अस्‍थायी भंडारण के लिए इनका प्रयोग किया जा सकता है।

    मंडी समाचार सेवा 

    कब और कितनी मात्रा में किस वस्‍तु का उत्‍पादन करना है और इसे कब और कहां बेचना है, ऐसे फैसले लेने में मंडी समाचार किसानों की मदद करते हैं। आमतौर पर प्रदेश के किसान संसाधनहीन और गरीब हैं और मंडी सूचनाओं से ज्‍यादा वाकिफ नहीं होते। मंडी सूचनाओं के लिए उन्‍हें स्‍थानीय व्‍यापारियों, आढ़तियों इत्‍यादि पर निर्भर रहना पड़ता है, जो कि मंडी रेट से कम कीमत पर उनके उत्‍पाद खरीदते हैं। किसानों को शोषण से बचाने के लिए राज्‍य की 10 मंडियों में 24 कृषि उत्‍पादों के रोजाना के भाव मंडी समितियों द्वारा एकत्रित किए जाते हैं और ऑल इंडिया रेडियो, शिमला/दूरदर्शन के जरिये इन्‍हें प्रसारित किया जाता है।